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प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा पर गुलजार ने लिखा- मरेंगे तो वहीं जाकर, जहां जिंदगी है

बॉलिवुड के मशहूर गीतकार, लेखक और डायरेक्टर सामाजिक मुद्दों पर काफी संवेदनशील रवैया रखते हैं। वह अपनी राय बेबाकी से रखने के लिए भी जाने जाते हैं। हाल में के कारण हुए के बाद देश भर में अलग-अलग जगहों के मजदूर अपने घरों पर लौटने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में गुलजार ने इन मजदूरों की दुर्दशा पर एक बेहद मार्मिक लिखी है। गुलजार ने इस कविता का वीडियो अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है। उन्होंने घर लौटते इन परेशान मजदूरों की दुर्दशा और उनके प्रति उदासीनता को अपनी कविता 'मरेंगे तो वहीं जाकर, जहां जिंदगी है' में लिखने का प्रयास किया है। गुलजार ने अपनी कविता से उन परिस्थितियों को बताया जो अभी सामने आ रही हैं। कविता में मजदूरों के अपने घर जाने के दर्द को बयान किया गया है। बता दें कि जब से लॉकडाउन लागू हुआ है तब से बड़ी संख्या में मजदूर बेरोजगार हो गए हैं और अपने गावों की ओर लौटने को मजबूर हैं। गलियों, मोहल्लों, हाइवे और रेलवे की पटरियों से गुजरते इन प्रवासी मजदूरों की तस्वीरें हर किसी को विचलित कर रही हैं। इन प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार द्वारा समय पर उचित कदम नहीं उठाए जाने के लिए भी मीडिया और आम लोगो के बीच काफी आलोचना हो रही है। इसके बाद अब केंद्र और राज्य सरकारें इन मजदूरों को इनके घर पहुंचाने के इंतजाम में लग गई हैं।


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